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अपने हेल्थ इंश्योरेन्स पॉलिसी में मैटरनिटी कवर के बारे में जानने वाली बातें

आजकल लोग मैटरनिटी और शिशु की देखभाल के साथ साथ स्वास्थ्य के बढ़ते खर्चों से पूरी तरह वाक़िफ़ हैं. बच्चे के पालन-पोषण और प्रेग्नेंसी और डिलीवरी से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए दम्पति एक आर्थिक योजना बनाते हैं. मैटरनिटी प्लान लेना इस योजना का बेहद ज़रूरी हिस्सा बन गया है. लेकिन, मैटरनिटी कवर की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद पॉलिसी धारक अभी तक ऐसी पॉलसी की ज़रूरी विशेषताओं के बारे में नहीं जानते हैं. इसीलिए, अगर आप अपना परिवार बढ़ाना चाहते हैं तो आपको मैटरनिटी इंश्योरेंस प्लान के बारे में यह सारी बातें पता होनी चाहिए

मैटरनिटी कवर लेने का सबस सही समय सा है?

ज़्यादातर मैटरनिटी इंश्योरेंस पॉलिसी का वेटिंग पीरियड 3-4 साल का होता है. इसका मतलब है कि वेटिंग पीरियड पूरा होने के बाद ही आप पॉलिसी में दिए गए फायदों का लाभ उठा सकते हैं. इसीलिए, शादी के तुरंत बाद ही मैटरनिटी कवर लेने के लिए सबसे सही समय होता है. आजकल हर दंपत्ति बच्चे पैदा करने के लिए कुछ इंतज़ार ज़रूर करते हैं, ऐसे में एक नवविवाहित जोड़े के तौर पर ही मैटरनिटी पॉलिसी लेना सबसे अच्छा विचार है.

मैटरनिटी पॉलिसी के तहत मिलने वाले फायदे कौन से हैं?

सामान्य और सीज़ेरियन दोनों तरह की डिलीवरी में मैटरनिटी इंश्योरेंस प्लान लागू होता है. प्रेग्नेंसी, प्रसव और डिलीवरी के बाद होने वाले खर्चों को कम करने के लिए पॉलिसी तैयार की गयी है. नीचे पॉलिसी के फायदे संक्षिप्त रूप में दिए गए हैं-

  • अस्पताल के पहले और बाद के खर्चों की देखभाल करता है

  • डिलीवरी के पहले और बाद के खर्चों की देखभाल करता है

  • नवजात शिशु को पूरी सुरक्षा

मैटरनिटी कवर में कौन सी मुख्य चीजें नहीं आती हैं?

नीचे दिए गए मामलों में मैटरनिटी कवर के फायदे लागू नहीं होते हैं-

  • अगर पॉलिसी खरीदने के समय गर्भवती हैं. ऐसे मामलों में बीमाकर्ता इसे पूर्व मौजूदा परिस्थिति मान सकता है और योजना द्वारा कवर नहीं किया जायेगा.

  • अगर वेटिंग पीरियड पूरा होने के पहले गर्भवती हैं

क्या मैटरनिटी इंश्योरेंस हेल्थ इंश्योरेंस का डिफ़ॉल्ट हिस्सा है?

नहीं, मैटरनिटी इंश्योरेंस आपके मुख्य हेल्थ इश्योरेंस पॉलसी का डिफ़ॉल्ट हिस्सा नहीं है. यह एक तरह की विशेषता है यानि कि इंश्योरेंस पॉलिसी का हिस्सा है. आज के समय में जहाँ मैटरनिटी खर्चों के साथ साथ अन्य किसी भी तरह के चिकित्सीय इलाज पर होने वाले खर्च बहुत ज़्यादा हैं, कुछ बिमाकर्ताओं ने हेल्थ इंश्योरेंस के साथ ही मैटरनिटी कवर देना भी शुरू कर दिया है. ज़्यादातर लोग हेल्थ इंश्योरेंस यह सोचकर खरीद लेते हैं कि मैटरनिटी भी उसी का एक हिस्सा है लेकिन ऐसा नहीं होता है. हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले बीमाकर्ता से इसके बारे में पूरी जानकरी लेना बहुत ज़रूरी होता है.

क्या मैटरनिटी इंश्योरेंस में जन्मजात परिस्थितियां भी शामिल होती हैं?

किसी भी तरह की असामान्यता, बीमारी, विकलांगता, रोग, या अवस्था के साथ पैदा होने वाले शिशु को जन्मजात बीमारी से ग्रस्त माना जाता है. कुछ हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी जन्मजात परिस्थितियों के लिए भी सुरक्षा देते हैं. लेकिन, हर पॉलिसी की सीमा अलग होती है. सामान्यतः, इंश्योरेंस पॉलिसी 90 दिनों अवधि तक नवजात शिशु को एक तय सीमा में सुरक्षा देते हैं.

मैटरनिटी कवर के लिए प्रीमियम की राशि कैसे निर्धारित की जाती है?

मैटरनिटी इंश्योरेंस वाले हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की प्रीमियम राशि बहुत ज़्यादा होती है. लेकिन, जो दंपत्ति या परिवार, भविष्य में अपना परिवार बढ़ाने के बारे सोचते हैं, उनके लिए मैटरनिटी कवर लेना ही सबस अच्छा कदम है. मैटरनिटी और प्रेग्नेंसी बहुत महंगे साबित हो सकते हैं और खर्चों को कम करने के लिए दंपत्ति को यह अतिरिक्त फायदे वाली पॉलिसी ज़रूर लेनी चाहिए.

अगर आपके पास व्यापक मैटरनिटी कवर वाली सामूहिक इंश्योरेंस पॉलिसी है तो?

ऐसे मामलों में, आपको अपने कॉर्पोरेट प्लान पर ही ध्यान देना चाहिए. इस तरह से आपका मुख्य हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में कोई बदलाव नहीं होगा और आपको नो-क्लेम बोनस का भी फायदा मिलेगा.

किन परिस्थितियों में मैटरनिटी क्लेम नामंजूर हो सकता है?

जो महिलाएं बच्चे के पालन पोषण के आखिरी हिस्से में गर्भवती होती हैं, सामान्यतः 35 साल की उम्र के बाद, उनके द्वारा पंजीकृत किया गया क्लेम नामंजूर हो सकता है. इस तरह की प्रेग्नेंसी में ज़्यादा जोखिम होते हैं और इसमें गर्भावस्था से जुड़ी परेशानियों भी हो सकती हैं.

हमारे हेल्थ इंश्योरेंस प्लान और उसके फायदे के बारे में अधिक जाने


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