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व्यक्तिगत बनाम कॉर्पोरेट स्वास्थ्य बीमा

अविनाश को रिटायर होते समय आखरी बार अपनी कंपनी में जाना अच्छा भी लग रहा था और साथ ही डर भी लग रहा था। आखिरकार अब उस दफ्तर को छोड़ने का समय आ ही गया था जिसे उन्होनें 25 वर्ष की उम्र में ज्वाईन किया था। अपने ऑफिस में एक अच्छी रिटायरमेंट पार्टी का आनंद लेने के बाद शाम को वे भारी मन से घर आ गए थे इस ख्याल के साथ कि अब उन्हें अगले दिन से दफ्तर नहीं जाना है। रात को उन्हें थोड़ी बेचैनी महसूस हुई और घरवालों उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए जहां डॉक्टर्स ने जब विभिन्न प्रकार के टेस्ट किए तब हार्ट आर्टिरिस के ब्लॉकेज के बारे में पता लगा और जिसका तुरंत ही ऑपरेशन करना पड़ा। इस प्रकार अचानक अस्पताल में भर्ती करने पर उन्हें एकदम 5 लाख रुपए खर्च करने पड़े। इसके साथ ही एक और वास्तविकता का उन्हें पता लगा कि अब न तो उनके पास कॉर्पोरेट स्वास्थ्य बीमा की सुरक्षा है और न ही कोई अलग से मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी है।

बहुत दुख की बात है कि कमोबेश यह स्थिति आज हर घर में सामान्य रूप से देखी जा सकती है। हममें से अधिकतर केवल इसलिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी नहीं खरीदते हैं क्योंकि हमारे पास कंपनी की कॉर्पोरेट बीमा की सुरक्षा पहले से ही होती है। कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि वो तो पूरी तरह से स्वस्थ हैं इसलिए इस बात को भूलकर कि स्वास्थ्य की रक्षा करने के खर्चे निरंतर दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं फिर भी वो एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर खर्च करना ज़रूरी नहीं समझते हैं। राष्ट्रिय सर्वे संगठन (एनएसएसओ) की रिपोर्ट के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अस्पताल में भर्ती होता है तब एक निजी अस्पताल में औसत रूप में आने वाले मेडिकल खर्चे, 2014 में सरकारी अस्पताल में आने वाले खर्चे के चार गुना सिद्ध होंगे।

यह भी आधिकारिक रूप से कहा जा सकता है कि कॉर्पोरेट दफ्तरों की अधिकतर पॉलिसी कर्मचारी की आयु और उसके सैलरी स्केल के आधार पर सुरक्षा देती हैं। यह भी कर्मचारी के रिटायर होने पर या तो कम हो जाती है या फिर खत्म हो जाती है। यदि आप वह नौकरी भी छोड़ देते हैं या बदल देते हैं तो आपको कॉर्पोरेट स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा के संबंध में यह गारंटी नहीं होती है कि नया नियोक्ता आपको पुराने स्वास्थ्य बीमा की वही पुरानी सुरक्षा ही देगा। इसलिए यही सलाह दी जाती है कि आप अपने लिए एक अलग से मेडिकल बीमा योजना जरूर लें जो न केवल आपको नौकरी के समय स्वास्थ्य सुरक्षा दे बल्कि रिटायरमेंट के बाद भी आपको उसी प्रकार की स्वास्थ्य सुरक्षा देनी जारी रखे। इससे आपको ज़रूरत पड़ने पर किसी भी प्रकार से अपनी बचत खाते में छेद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

वरिष्ठ लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा:

यह बात तो सर्वमान्य है कि व्यक्ति का स्वास्थ्य हर आयु और हर समय एक जैसा नहीं रहता है, इसलिए यह आवश्यक है कि वरिष्ठ लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा अवश्य ली जाये जिससे मेडिकल खर्चों पर होने वाली राशि को बचाया जा सके।

हर युवा व्यक्ति अपने वरिष्ठ माता-पिता की स्वास्थ्य के संबंध में परेशान रहता हैं यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब माता-पिता की आयु 60 वर्ष से अधिक हो जाती है। कुछ कॉर्पोरेट स्वास्थ्य बीमा उनके कर्मचारियों के माता-पिता को भी सुरक्षा प्रदान करते हैं लेकिन हर कॉर्पोरेट हाउस ऐसा नहीं करता है। इसके अलावा कॉर्पोरेट बीमा, वैसे भी उम्र बढ़ने के साथ बढ़ने वाले मेडिकल खर्चों को पूरी तरह से पूरा करने में असमर्थ रहती है। पिछले कुछ वर्षों में, तकनीकी और चिकित्सा जगत में होने वाले विकास के कारण जीवन प्रत्याशा में वृद्धि हुई है। लेकिन वहीं साथ में बढ़ती महंगाई के कारण बीमारियों के इलाज पर होने वाले खर्चे में भी अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा सकती है।

अपने माता-पिता के लिए अच्छी मेडिकल सुरक्षा लेने के लिए आपको वरिष्ठ लोगों के लिए बनी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेने का निर्णय लेना चाहिए। हालांकि वरिष्ठ लोगों के लिए बनी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी इतनी अधिक व्यापक नहीं होती हैं जैसे युवा वर्ग के लिए बनी मेडिक्लेम पॉलिसी होती है। समय के साथ स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट आती है और वहीं मेडिकल सुरक्षा की जरूरत भी बढ़ती जाती है। इसके लिए बाज़ार में अनेक व्यापक बीमा योजना उपलब्ध हैं जो वरिष्ठ लोगों के लिए भी स्वास्थ्य सुरक्षा देने का काम करती हैं।

देश में बढ़ती हुई मेडिकल खर्चों को देखते हुए वरिष्ठ लोगों के लिए एक अच्छी स्वास्थ्य बीमा योजना को लेना सही निर्णय माना जा सकता है।

भारत में स्वास्थ्य बीमा योजना लेने से पहले ध्यान रखने वाली बातें

  • बीमा में मिलने वाली सुरक्षा की जांच करें: किसी भी बीमा पॉलिसी में किसी भी स्वास्थय संबंधी परेशानी जैसे साधारण बीमारी, गंभीर बीमारी या दुर्घटना के होने पर होने वाले खर्चों की सुरक्षा देने की उम्मीद की जाती है। जैसे यदि आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है तब आपकी मेडिक्लेम पॉलिसी आपके कमरे का किराया सारा वहन करेगी या केवल उसका कुछ ही भाग का भुगतान करेगी। इसी प्रकार, क्या आपकी बीमा कंपनी डे केयर के खर्चे का भुगतान करेगी? इस बीमा पॉलिसी में अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के किन खर्चों की सुरक्षा दी जाएगी? किसी भी बीमा पॉलिसी के पक्ष या विपक्ष में निर्णय लेने से पहले इन सभी सवालों के सही जवाब लेने जरूरी हैं।

  • प्रतीक्षा समय की जानकारी लें- जब कोई बीमा कंपनी बीमा पॉलिसी को खरीदने के बाद बीमा धारक हो कुछ समय के लिए बीमा सुरक्षा नहीं देता है तब इस समय अवधि को प्रतीक्षा समय कहा जाता है। अच्छा तो यही रहता है कि बीमा धारक को बीमा पॉलिसी के वास्तव में शुरू होने से पहले ही प्रतीक्षा समय गुज़ार देना चाहिए। अधिकतर बीमा योजना में 30 दिनों का ही प्रतीक्षा समय दिया जाता है इस संबंध में यह भी देखें कि क्या पहले से उपस्थित बीमारी पर भी प्रतीक्षा समय लागू होता है? अधिकतर बीमा कंपनियाँ पहले से उपस्थित बीमारियों के लिए 3-4 वर्ष का प्रतीक्षा समय लागू मानती हैं।

  • बहिष्करण के बारे में जानें: जहां यह जानना जरूरी है कि क्या-क्या शामिल किया गया है वहीं यह देखना भी जरूरी है कि क्या-क्या नहीं शामिल किया गया है। सबसे प्रमुख बहिष्करण है युद्ध के कारण होने वाले घाव और चोट, आत्महत्या के कारण लगी चोटें या शराब के नशे में खुद को लगाई गईं चोटें आदि। बीमा क्लेम को बीमा कंपनी के द्वारा रिजेक्ट करने से तो अच्छा है कि पहले ही यह जान लिए जाये कि क्या-क्या बीमा कंपनी की बहिष्करण सूची में शामिल है?

  • सह भुगतान को भी देख लें: जब बीमा धारक को कुल मेडिकल बिल का कुछ प्रतिशत अपनी ओर से देना होता है तब इसे सह भुगतान कहा जाता है। वरिष्ठ लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा की स्थिति में यह प्रतिशत 40% तक हो सकता है। इसलिए उस बीमा पॉलिसी का चयन करें जिसका सह भुगतान का प्रतिशत कम हो।

इन सब बातों के अतिरिक्त, दो और बातें भी हैं जिनका वरिष्ठ लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेने से पहले ध्यान देना जरूरी है:

  • वह पॉलिसी जिसका आजीवन नवीनीकरण करवाया जा सके, उसका ही चयन करें;

  • उस पॉलिसी में जिसमें पहले से उपस्थित बीमारियों और गंभीर बीमारियों के लिए प्रतीक्षा समय कम हो, उसका ही चयन उत्तम रहता है

भारतीय अर्थव्यवस्था में जब मुद्रास्फीति की दर 15% के आसपास घूम रही है, तब स्वास्थ्य बीमा को खरीदना हालांकि एक कठिन कदम साबित हो सकता है लेकिन फिर भी अपने और अपने प्रिय जनों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इस कदम को उठाया जाना बहुत जरूरी है। इसलिए केवल कॉर्पोरेट पॉलिसी पर ही निर्भर न रहकर एक व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना को लेना ही समझदारी भरा कदम हो सकता है। इससे कोई अंतर नहीं पड़ता, कि चाहे आप एक व्यक्तिगत मेडिक्लेम खरीदें या माता-पिता के लिए वरिष्ठ स्वास्थ्य बीमा योजना खरीदें, किसी भी आकस्कमक स्थिति के उत्पन्न होने से पूर्व ही अपनी जरूरतों की प्राथमिकताओं को देखते हुए उचित रूप से सुरक्षा का लेना ही अक्लमंदी वाला कदम हो सकता है। आखिरकार यह आपके स्वास्थ्य का मामला है, आप इस संबंध में कोई खतरा नहीं उठा सकते हैं!

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